C3W 2015 सम्मेलन में जुटी जनआंदोलनों से जुड़ीं शख्सीयतें : क्लाइमेट चेन्ज पर हुआ मंथन

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_MG_8631जयपुर। सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी जयपुर में शुक्रवार को जलवायु परिवर्तन पर दो दिवसीय चौथा राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कन्वेन्शन ऑन क्लाइमेट चेन्ज एण्ड वॉटर- 2015’ (SGVU-c3w 2015) शुरू हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन पूर्व आईपीएस और सामाजिक कार्यकर्ता किरण बेदी, नर्मदा बचाओं आंदोलन की मुख्या और एक्टिविस्ट मेघा पाटकर, जानीमानी एक्टिविस्ट और मैगससे पुरस्कार विजेता अरुणा राय, सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी के चेयरमैन श्री सुनील शर्मा, यूनिवर्सिटी के चीफ मेंटर डॉ. सुधांशु और वाइस चांसलर डॉ. ए.के. खरे ने द्वीप प्रज्वलित कर किया।

उद्घाटन संबोधन में किरण बेदी ने कहा कि एन्वायर्नमेंट के दूषित होने से लोगों की क्वालिटी ऑफ लाइफ खत्म हो रही है। इसे बचाने के लिए हमें इसके इश्यूज की पहचान करनी होगी। इसके लिए हमें ग्रास रूट पर जाना होगा क्योंकि ये इश्यूज हवा, पानी, धूंआ, कचरा आदि के अनुसार अलग अलग जगह पर अलग अलग हो सकते हैं। इसके बाद प्लान और पॉलिसी बनानी होगी तभी रिजल्टस मिलेंगे। इसमें यूवाओं की भागीदीरी महत्वपूर्ण हैं।

_MG_8635सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी के चेयरमैन श्री सुनील शर्मा ने प्रश्न उठाया कि क्या आज जो लोग एन्वायर्नमेंट के बैनिफिटी है, वो उसी मात्रा में इसका बर्डन शेयर करते हैं? क्या एन्वायर्नमेंट दूषित करने के जिम्मेदार लोग भी इससे प्रभावित होते हैं? वैश्विक परिदृश्य में ऐसा देखाई नहीं दे रहा है। इस दिशा में जिम्मेदारी तय हो, इसके लिए हमें वातावरण तैयार करना होगा।

मैगससे पुरस्कार विजेता अरुणा रॉय ने कहा कि पर्यावरण अब पैसे और राजनीति से जुड़ी चीज है। यदि हम केवल एन्वायर्नमेंट की बात करते हैं और पैसे और राजनीति की बात नहीं करते हैं तो मामला आगे नहीं बढेगा। अत: यह प्रश्न उठना जरूरी है। उन्होंने कहा जब हम एन्वायर्नमेंट को सुरक्षित रखते हैं तो वह छोटी से बड़ी सब चीज तक झलकना चाहिए।

जानी-मानी एक्टिविस्ट मेघा पाटेकर ने कहा कि सत्ता में दखल रखने वाले लोग जमीन और पानी का इस्तेमाल अपने मन के मुताबिक करते हैं और इस मुद्दे पर शासन का रैवया न केवल उदासीन है बल्कि आम लोगों से दूरी बनाये हुए हैं। शासन में बैठे लोग यह मानते हैं कि हर चीज के हम ही एक्पर्ट हैं और हम जो कर रहे हैं वह सही है। उन्होंने एन्वायर्नमेंट के मुद्दे पर जनता के जुड़ाव को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर हम यह इंतजार नहीं कर सकते है कि जहां जब समस्या होगी तब देखेंगें। उन्होंने ईको सिस्टम और सही तकनीक से इस समस्या से बचाव की बात कही।

डॉ. सुधांशु ने कन्वेशन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी द्वारा एन्वायर्नमेंट पर किए गए कार्य गिनाये। उन्होने बताया कि यूनिवर्सिटी ने हिमालय का गलेशियर और सांभर लेक में एक गांव भी गोद लिया है। उन्होंने बताया कि अरावली की पहाड़ियों में हो रही माइनिंग पर यूनिवर्सिटी रिसर्च करेंगी।

सेशन्स में हुआ टेक्निकल इश्यूज पर डिस्कशन
उद्घाटन सेरेमनी के बाद कन्वेशन में तीन टेक्निकल सेशन ‘क्लाइमेट फोरम’, ‘सस्टेनिब्लिटी फोरम’ और ‘वाटर फोरम’ हुए। इन सेशन्स में क्लाईमेट चेंज के विभिन्न तकनीकि पहलुओं पर डिस्कशन हुआ तथा एक्पर्टस ने इसके तकनीकि समाधान भी सुझाये। जिसमें प्रोफसर ए.डी. सावंत पूर्व वाइस चांसलर राजस्थान यूनिवर्सिटी और मुंबई यूनिवर्सिटी, फादर ऑर रिन्युअल एनर्जी प्रोफेसर एच.पी. गर्ग (सीनियर एडवाइजर, मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्युअल एनर्जी भारत सरकार), प्रोफेसर आर. भास्कर सहित दो दर्जन से अधिक सीनियर प्रोफेसर्स, पर्यावरणविद्, सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षाविद्धों ने अपनी रिसर्च और अनुभव को साझा किया जो उन्होंने इस फिल्ड में की है।

सीथ्रीडब्ल्यू 2015 के एक्जिक्यिूटिव ऑफिसर डॉ. स्वाति मिश्रा और पंकज खत्री ने बताया कि दो दिवसीय कन्वेशन में देशभर से 2500 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहें हैं। ये प्रतिभागी अपने रिसर्च पेपर प्रजेंट करेंगे और मॉडल मेकिंग और पोस्टर प्रजेंटेशन कंपीटिशन में भी हिस्सा लेंगें। समापन शनिवार को होगा।

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