सरकार से अलग हुई टीडीपी, पीएम ने नहीं उठाया चंद्रबाबू का फोन

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नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलगूदेशम पार्टी (टीडीपी) ने केंद्र सरकार से अलग होने का फैसला किया है. नायडू ने खुद एक प्रेस कांफ्रेंस में इसकी घोषणा की. हालांकि उनकी पार्टी एनडीए से भी अलग होगी या नहीं, इस पर फैसला नहीं हुआ है. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पूरी न होने पर यह फैसला किया. उन्होंने इसके पीछे प्रदेश की जनता के हित की बात कही. प्रेस कांफ्रेंस से पहले ही चंद्रबाबू नायडू अपने केंद्र सरकार से अलग होने के फैसले की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहते थे. लेकिन प्रधानमंत्री ने उनका फोन रिसीव नहीं किया. यह बात उन्होंने ट्वीट कर बताई है.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने फैसले से अवगत कराना चाहता था. उनसे संपर्क करने की कोशिश किया. मगर वे उपलब्ध नहीं रहे.” इससे पहले भी नायडू ने दो ट्वीट किए. एक ट्वीट में जहां उन्होंने कहा-मैं किसी से नाराज नहीं हूं. यह फैसला आंध्र प्रदेश की जनता की भलाई के लिए लिया गया है. वहीं दूसरे ट्वीट में बोले-केंद्र लगातार एकतरफा फैसले कर रहा है. अब हमारा धैर्य टूट गया है. केंद्र सरकार से जुड़ने की मंशा पूरी नहीं हुई, इसलिए यह अलग होने का समय है.

नायडू की पार्टी टीडीपी के कुल 16 सांसद हैं. यह एनडीए सरकार में संख्याबल के लिहाज से तीसरी बड़ी पार्टी है. मोदी कैबिनेट में टीडीपी से दो मंत्री शामिल हैं. एक अशोक गजपति राजू और दूसरे वाईएस चौधरी. सरकार से पार्टी के अलग होने के एलान के बाद अब इन मंत्रियों के जल्द इस्तीफे देने की संभावना है. दरअसल आंध्र प्रदेश में सत्ता और विपक्ष दोनों सूबे को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने नायडू को इस बाबत भरोसा दिया था. मगर केंद्र सरकार के चार साल पूरे होने के बाद भी मांग पूरी न होने पर नायडू ने सरकार से अलग होने का फैसला लिया.

केंद्र सरकार ने 2016 में आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज देने की घोषणा की थी, मगर नायडू सरकार ने फूटी कौड़ी न मिलने की बात कही.

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