महाशिवरात्रि पूजा और अभिषेक विधि

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नई दिल्ली. तीनों लोक के मालिक भगवान शिव का सबसे बड़ा त्योहार महाशिवरात्रि है. इस दिन भगवान शिव पृथ्वी पर उन जगहों पर होते हैं, जहां-जहां उनके शिवलिंग हैं. यह पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है.

मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर और मां पार्वती का विवाह हुआ था और इसी दिन पहला शिवलिंग प्रकट हुआ था. साथ ही महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था, जो समुद्र मंथन के समय बाहर आया था.

महाशिवरात्रि के दिन शिवभक्तों का जमावड़ा शिव मंदिरों में विशेष रूप से देखने को मिलता है. मान्यता के मुताबिक भगवान भोले नाथ प्रसन्न होते हैं, जब उनका पूजन बेल-पत्र आदि चढ़ाते हुए किया जाता है.

आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि व्रत को रखने वालों को पूरे दिन, भगवान भोले नाथ का ध्यान करना चाहिए. इस दिन प्रातः स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है. इसके बाद ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर धूप, पुष्पादि और अन्य पूजन सामग्री से शिव की पूजा करनी चाहिए.

इस व्रत में चारों प्रहर में पूजन किया जाता है. प्रत्येक पहर की पूजा में ‘ऊं नमः शिवाय’ व ‘शिवाय नमः’ का जाप करते रहना चाहिए.

अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हों तो घर की पूर्व दिशा में, किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता है.

शिव अभिषेक विधिः
महाशिवरात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिए सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किए जाते हैं.

व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ करना या सुनना चाहिए और मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए.

शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है.

व्रत करने और पूजन के साथ जब रात्रि जागरण भी किया जाए तो यह व्रत और अधिक शुभ फल देता है. इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी, इसलिए रात्रि में शिव की बारात निकाली जाती है.

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